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घुटने में दर्द का कारण, लक्षण और घरेलु इलाज

घुटने का दर्द जो असहनीय होता है और लोगों के लिए काफी मुश्किल भी खड़ी करता है, इसके अलावा घुटने का दर्द व्यक्ति को चलने में असमर्थ बना देता है इसलिए इसमें सामान्य सा भी दर्द हो तो इसे नज़रअंदाज़ न करके कैसे हम इस तरह के दर्द से खुद का बचाव कर सकते है, वो भी घरेलू उपाय की मदद से। तो आप भी अगर घुटने में दर्द की समस्या से परेशान है तो आर्टिकल के साथ अंत तक बने रहें ;

क्या है घुटने का दर्द ?

  • घुटने के दर्द की बात करें तो इससे बुजुर्ग वर्ग ज्यादा परेशान रहते है तो वही कुछ मामले घुटनो में दर्द के युवाओं में भी देखने को मिल रहें है वो भी उनके बढ़ते वजन की वजह से।
  • अक्सर हमारे द्वारा दौड़ते, खेलते, यात्रा करते, सीढ़ियां चढ़ते या दैनिक जीवन के कामों को करते समय घुटने में सामान्य या गहरी चोट लग जाती है जिसके कारण घुटने में दर्द होता है। 
  • वही अगर आपको घुटने में चोट लग गई है तो इससे बचाव के लिए आपको समय पर ही कुछ घरेलू उपायों को अपना लेना चाहिए।

यदि गहरी चोट की वजह से आपके घुटने में भी दर्द की समस्या बनी रहती है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट ऑर्थोपेडिक सर्जन का चयन करना चाहिए। 

घुटने में दर्द के कारण क्या है ?

  • घुटने में दर्द के प्रमुख कारण की बात करें तो ये घुटने में लगे गंभीर चोट की वजह से होता है। 
  • वही घुटने में चोट की वजह से हड्डियों, उपास्थि, लिगामेंट्स, टेंडन और तरल पदार्थ की थैली या बर्से को गंभीर नुकसान हो सकता है।

घुटने में दर्द से बचाव के लिए घरेलु उपाय ?

  • घुटने में दर्द से बचाव के लिए आपको राइस ट्रीटमेंट जिसे पैरों को कुछ समय आराम देने के नाम से भी जाना जाता है ऐसे में जब आप अपने पैरों को आराम देते है तो आपको सामान्य सी चोट लगी होगी तो वो आसानी से ठीक हो जाती है। 
  • इसके अलावा आप कुछ खाने की चीजों पर ध्यान देकर भी इस तरह की समस्या से खुद का बचाव आसानी से कर सकते है, तो खाने की चीजों के बारे में बात करें तो वो है – दूध, हल्दी, अदरक, लहसुन, लाल मिर्च, मेथी दाना, सेंधा नमक, निम्बू, सरसो का तेल, सेब का सिरका, जैतून का तेल, नारियल का तेल, गर्म व ठंडी सिकाई, पुदीना का तेल, लोबान तेल। 
  • इसके साथ ही, आप विटामिन-सी और विटामिन-डी से भरपूर खाद्य पदार्थों को भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते है।

अगर आपका घुटने का दर्द इन उपायों से भी ठीक नहीं हो रहा है तो इसके लिए आप घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी का चयन करें पर डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

घुटने में दर्द के लक्षण क्या है ?

  • इसके लक्षणों की बात करें तो इसमें आपको घुटने को मोड़ने में परेशानी आ सकती है।  
  • घुटने के आसपास आपको सूजन का एहसास हो सकता है। 
  • पैरों को हिलाते समय घुटने से हड्डी टकराने की आवाज भी आ सकती है।

घुटने में दर्द से बचाव के लिए बेस्ट हॉस्पिटल ?

अगर आप भी घुटने में दर्द की समस्या से बहुत ज्यादा परेशान है और ये परेशानी उपरोक्त घरेलु उपायों से भी न संभले तो इसके लिए आपको हुंजन हॉस्पिटल से घुटने की सर्जरी का चयन कर लेना चाहिए। पर ध्यान रहें घुटने में दर्द की समस्या को ज्यादा गंभीर न होने दे।  

निष्कर्ष :

घुटने में दर्द की समस्या जोकि व्यक्ति को चलने में असमर्थ बनाता है, इसलिए जरूरी है की इसके दर्द से बचाव के लिए आपको अपने खान-पान का खास ध्यान रखना चाहिए और किसी भी तरह की समस्या आने पर डॉक्टर का चयन जरूर करें।

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दोनों घुटनों की एक साथ रिप्लेसमेंट सर्जरी से पहले किन बातों का रखें ध्यान !

लोगों के लिए काफी मददगार है घुटने की सर्जरी क्युकि इस सर्जरी की मदद से लोग अपने पैरों पर चलने में सक्षम हो पाते है। वहीं कुछ लोगों का ये सवाल सामने आया है घुटने की सर्जरी को लेकर की क्या हम दोनों घुटने की एक साथ सर्जरी करवा सकते है और दोनों घुटने की सर्जरी को एक साथ करने से हमें इसका कोई नुकसान तो नहीं देखना पड़ेगा। वहीं आज के लेख में हम घुटने की सर्जरी के क्या फायदे है इसके बारे में बात करेंगे ;

क्या है घुटने की सर्जरी ?

  • घुटने की सर्जरी का चयन अकसर वो लोग करते है जिन्हें घुटने में दर्द की समस्या हो या जो चलने में असमर्थ हो। 
  • अगर घुटने में दर्द की समस्या से आप भी परेशान है तो इससे बचव के लिए आपको घुटना बदलने की सर्जरी का चयन करना चाहिए। 

क्या दोनों घुटने को एक साथ बदलवाना सही है ?

  • दोनों घुटने को एक साथ बदलवाने की वजह से आपके शरीर पर बहुत अधिक तनाव और दबाव पड़ सकता है। वहीं डॉक्टर की बात करें तो वो इस सर्जरी को करवाने की सलाह सिर्फ उन्हें ही देते है जो इस सर्जरी के दबाव और अन्य जटिलताओं को संभाल सके;
  • तो वहीं एक साथ दोनों घुटने को बदलने की सलाह डॉक्टर आपको तभी दे सकते है जब आप युवा है, सक्रिय है और आपकी मांसपेशियों की ताकत अच्छी है।
  • आप शारीरिक रूप से स्वस्थ है और आपका समग्र स्वास्थ्य अच्छा है।
  • आपके हृदय और फेफड़ों से संबंधित कोई अंतर्निहित चिकित्सीय समस्या नहीं है, तो एक साथ दोनों घुटने को बदलवाने की सलाह आपके डॉक्टर आपको दे सकते है।

अगर घुटने का दर्द आपके कमर तक पहुंच गया है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट स्पाइन सर्जन का चयन करना चाहिए।

दोनों घुटने को बदलवाने की सर्जरी काम कैसे करती है ?

  • यह सर्जरी दो तरीके से काम करती है, जैसे- पहला है चरणबद्ध द्विपक्षीय घुटने का प्रतिस्थापन, बता दे आपको की इस पहली सर्जरी में आपके दोनों घुटनों को दो अलग-अलग सर्जरी में, या बीच में कुछ महीनों का अंतर रखते हुए, एक-एक करके बदल दिया जाता है।
  • वहीं जब एक साथ द्विपक्षीय घुटने का प्रतिस्थापन, किया जाता है तो इसमें एक ही सर्जरी के दौरान दोनों घुटनों को बदल दिया जाता है।

एक ही समय में दोनों घुटने को बदलवाने की सर्जरी के क्या है फायदे और नुकसान ?

  • इस सर्जरी के फायदे की बात करें तो इसमें आपकी दोनों घुटनों की रिप्लेसमेंट सर्जरी एक ही प्रक्रिया में होती है।
  • आपको कम से कम समय की छुट्टी की आवश्यकता हो सकती है।
  • घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद ठीक होने का समय दोनों घुटनों के लिए एक ही होता है। 
  • आप एक ही सर्जरी से कम लागत का लाभ भी उठा सकते है। 

वहीं इस सर्जरी से दोष की बात करें तो द्विपक्षीय कुल घुटने आर्थ्रोप्लास्टी के लिए लंबे समय तक एनेस्थीसिया की आवश्यकता होती है। 

  • इसमें एकल घुटना प्रतिस्थापन प्रक्रियाओं की तुलना में अधिक रक्त हानि शामिल है। 
  • सर्जरी के बाद रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है।
  • एक साथ द्विपक्षीय कुल घुटने के प्रतिस्थापन में जटिलताएँ अधिक होती है।
  • आपको अपनी पुनर्प्राप्ति अवधि के दौरान अधिक सहायता की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि दोनों घुटने ठीक हो रहे है और आंशिक समर्थन के लिए कोई पैर नहीं है।
  • यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं है. उच्च जोखिम वाली चिकित्सा स्थितियों वाले लोगों को इस प्रकार की सर्जरी से खुद का बचाव करना चाहिए।

सुझाव :

अगर आप घुटने में दर्द की समस्या से बहुत ज्यादा परेशान है तो इससे बचाव के लिए आपको हुंजन हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए अपने घुटने की सर्जरी के लिए। 

निष्कर्ष :

एक साथ दोनों घुटने की सर्जरी को करवाना सही है या गलत इसके बारे में जानने के लिए आपको उपरोक्त बातो का खास ध्यान रखना है और साथ ही किसी भी तरह की जल्दबाजी में आकर इस सर्जरी का चयन आपको नहीं करना चाहिए।

 

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घुटने में दर्द के क्या है, कारण, लक्षण और घरेलु इलाज ?

घुटने का दर्द किसी भी उम्र में हो हमेशा व्यक्ति के लिए परेशानी ही खड़ी करता है, इसके अलावा अगर ये दर्द बजुर्ग लोगों में हो जाए तो ऐसा जान पड़ता है की जैसे उन पर पहाड़ ही गिर पड़ा हो क्युकी घुटने का दर्द होता ही ऐसे है। वहीं घुटने में दर्द की समस्या से हर 10 में से 7 व्यक्ति ग्रस्त रहते है, लेकिन आज के लेख में हम इस दर्द से कैसे खुद को बाहर निकाल सकते है वो घरेलु उपाय की मदद से इसके बारे में चर्चा करेंगे ;

क्या है घुटने में दर्द की समस्या ?

  • घुटने का दर्द एक आम शिकायत है जो सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। गंभीर घुटने का दर्द चोटों का कारण हो सकता है जैसे टूटे हुए स्नायुबंधन या फटे उपास्थि। कुछ स्वास्थ्य समस्याएं जो आपको गंभीर घुटने का दर्द दे सकती है, जैसे गठिया, या गठिया का संक्रमण। 
  • वहीं घुटने का दर्द शारीरिक गतिविधियों के कारण भी हो सकता है और वो है मोटापा।

घुटने में दर्द के कारण क्या है ?

  • घुटने में दर्द होने का सबसे आम कारण उम्र का बढ़ना, चोट का लगना और अपने घुटनों पर बहुत अधिक तनाव डालना है। 
  • इसके अलावा घुटने की कुछ समस्याओं में मोच या तनावग्रस्त स्नायुबंधन, उपास्थि आँसू और गठिया शामिल है।
  • वहीं चोट के बिना घुटने में दर्द के कुछ सामान्य कारणों की बात करें तो वो है:
  • बर्साइटिस (Bursitis)।
  • टेंडिनिटिस (Tendinitis)।
  • पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस।
  • संधिशोथ आदि।

अगर आप घुटने में दर्द के कारण बहुत ज्यादा परेशान है तो इससे बचाव के लिए आपको घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी का चयन करना चाहिए।

घुटने में दर्द के लक्षण क्या है ?

  • सूजन और जकड़न की समस्या। 
  • स्पर्श करने के दौरान लाली और गर्मी का महसूस होना। 
  • कमजोरी की समस्या। 
  • चटकने की आवाजों का आना। 
  • घुटने को पूरी तरह से सीधा करने में असमर्थता का सामना करना। 
  • लगातार दर्द का होना आदि। 

घुटने में दर्द के इन लक्षणों से अगर आप भी परेशान है तो इससे निजात पाने के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट ऑर्थोपेडिक सर्जन का चयन करना चाहिए।

कौन-से घरेलु उपाय घुटने के दर्द में है सहायक ?

  • घरेलु उपायों की अगर बात करें तो जिन लोगों का वजन अधिक होता है उन्हें घुटने में दर्द होने का खतरा अधिक होता है, इसलिए वजन को कम करें। 
  • इसके अलावा उचित आहार बनाए रखने से घुटने के दर्द को कम करने में मदद मिलेगी। आहार की बात करें तो इसमें आप फल, सब्जियां और फाइबर (उच्च) मांस, पशु वसा, और अन्य कम वसा का सेवन करें जिससे आप घुटने में दर्द की समस्या से जल्द आराम पा सकते है।
  • मालिश करने से भी आप घुटने में दर्द की समस्या से आराम पा सकते है।
  • हीट पैक और कोल्ड पैक भी आपके घुटने में दर्द के लिए काफी आरामदायक माना जाता है।
  • शारीरिक गतिविधि, जैसे व्यायाम जोड़ों को मजबूत बनाने में मदद करता है। उचित व्यायाम करने से आपको घुटने के दर्द से राहत मिलेगा। 
  • रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में हल्दी डाल कर पीने से भी आपको घुटने में दर्द की समस्या से आराम मिल सकता है। 
  • सेब का सिरका भी काफी मददगार है घुटने में दर्द की समस्या से निजात दिलवाने में।  

अगर आपको इन घरेलु उपायों से भी घुटने में दर्द की समस्या से आराम न मिले, तो इसके लिए आप हुंजन हॉस्पिटल के अनुभवी डॉक्टरों का चयन जरूर से करें, वहीं इस हॉस्पिटल में घुटने की सर्जरी या घुटना को बदलकर नए घुटने लगाए जाते है जिससे मरीज़ को अपने दर्द की समस्या से आराम मिलता है।

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जोड़ों का दर्द: कारण, प्रकार, उपाय, सर्जरी

जोड़ों का दर्द: कारण, प्रकार, उपाय, सर्जरी

जोड़ो का दर्द क्या है ?

जोड़ो के दर्द से निजात पाने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी हैं कि ये दर्द हैं क्या ?

 मांसपेशियों के कमजोर होने और शरीर में कैल्शियम की कमी होने और हड्डियों के जोड़ों में यूरिक एसिड जमा होने पर सूजन हो जाती है. इससे जोड़ों के टिश्यू नष्ट होने लगते हैं, जिससे जोड़ों में अकड़न और दर्द की शुरुआत हो जाती है.

  • शरीर के वो हिस्से जहाँ दो या दो से अधिक हड्डियां मिलकर हमारे शरीर की गतिविधयों को बनाए रखने में सहायक होती हैं। उसी को हम जॉइंट्स या जोड़ कहते है।
  • तो वही एक इंसान के शरीर में कई जॉइंट्स होते है और जब इन जोड़ में दर्द या बेचैनी होने लगती है, तो उसे ही हम जोड़ों का दर्द या (जॉइंट्स पेन) कहते है। कई बार ये दर्द कुछ ही समय में ठीक हो जाता है। पर कभी-कभी यह दर्द असहनीय हो सकता है।

जोड़ो के दर्द के प्रकार हैं ?

जोड़ो के दर्द के प्रकार को हम निम्न प्रस्तुत करेंगे..,

  • जोड़ो का दर्द मुख्यतः आर्थराइटिस की वजह से होता हैं, और आर्थराइटिस को हम गठिया भी कहते हैं।
  • यानि की गठिया या जोड़ो का दर्द दो तरीके के होते हैं, पहला ऑस्टियोआर्थराइटिस और दूसरा रुमेटीइड एस्थिराइटिस।

जोड़ो के दर्द के कारण क्या हैं ?

जोड़ो के दर्द के कई कारण माने जाते हैं, जिनमे से कुछ कारणों को हम निम्नलिखित में प्रस्तुत कर रहें हैं..,

  • मोच या खिंचाव।
  • ऑस्टिओआर्थरिटिस या गठिया की समस्या जो उम्र के साथ लोगों को काफी प्रभावित करती है।
  • काफी बार पुरानी दुर्घटनाओं में लगी चोट भी समस्या का कारण बन सकती है।
  • कमज़ोर हड्डियां भी कारण होती हैं।
  • जोड़ो में इन्फेक्शन का होना।

जोड़ो के दर्द के कारणों को जानने के बाद यदि आप दर्द से हमेशा के लिए निजात पाना चाहते हैं। तो रोबोटिक घुटना बदलना की सर्जरी या ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी का चयन किसी बेहतरीन हॉस्पिटल से करें।

जोड़ो के दर्द से बचने के उपाए क्या हैं ?

जोड़ो के दर्द से बचने के काफी उपाए को हम निम्न में प्रस्तुत कर रहे हैं..,

  • जोड़ों के दर्द से बचने के लिए अपने वजन को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है, क्यूंकि जब हमारा वज़न अधिक होता है तब हमारे जोड़ों पर ज़रुरत से ज़्यादा दबाव पड़ता है जिस वजह से जॉइंट्स समय से पहले खराब होने लग जाती है।
  • जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए हमे अपने खान-पान में पौष्टिक आहार को अत्यधिक महत्व देना चाहिए। दूध, विटामिन इ, और ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना हमारी हड्डियों और जोड़ों के लिए काफी लाभदायक है।
  • खाने का तो हमे खास ध्यान रखना ही हैं पर उसके साथ ही नियमित व्यायाम को भी अपनी जीवन शैली में शामिल करना चाहिए। जिससे की जोड़ो के दर्द से हमें आराम मिल सकें।
  • दर्द से निदान के लिए आप गरम या ठंडी सिकाई का उपयोग भी कर सकते है। क्युकि गरम सिकाई करने से खून संचार बेहतर होता है जबकि ठंडी सिकाई से सूजन और चुभन से हम आराम महसूस करते हैं।

निष्कर्ष :

यदि आपको जोड़ो के दर्द ने काफी परेशान कर रखा हैं तो बिना समय गवाए इसके लिए किस बेहतरीन हॉस्पिटल का चुनाव करें या आप हुंजन हॉस्पिटल का चयन भी कर सकते है। अपने घुटने के दर्द से निजात पाने के लिए। बता दे की यदि आप घुटने का इलाज करवाने इस हॉस्पिटल में आए तो यहाँ के अनुभवी डॉक्टर, डॉ बलवंत सिंह हुंजन से जरूर मुलाकात करें।

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जानिए ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटीइड गठिया के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ?

गठिया, एक प्रचलित स्वास्थ्य स्थिति, विभिन्न रूपों में प्रकट होती है, जिसमें ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटीइड गठिया के दो सबसे आम प्रकार है। ये स्थितियां जोड़ों को प्रभावित करती है, जिससे असुविधा, दर्द और सीमित गतिशीलता भी होती है। प्रभावी प्रबंधन और उपचार के लिए उनके अंतर और समानता को समझना भी महत्वपूर्ण है ;

ऑस्टियोआर्थराइटिस क्या है ?

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस, जिसे अक्सर “घिसने और फटने वाला गठिया” कहा जाता है, उपास्थि के टूटने के कारण होता है, वह ऊतक जो जोड़ों में हड्डियों के सिरों को सहारा देता है। यह आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होता है, मुख्य रूप से घुटनों, कूल्हों, हाथों और रीढ़ को प्रभावित करता है। इस स्थिति में, उपास्थि क्षतिग्रस्त और घिस जाती है, जिससे दर्द, कठोरता और जोड़ों का लचीलापन कम हो जाता है।
  • वहीं जैसे-जैसे उपास्थि घिसती जाती है, हड्डियाँ एक-दूसरे से रगड़ सकती है, जिससे दर्द, सूजन और कभी-कभी हड्डी में मोच का निर्माण हो सकता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस के जोखिम कारकों में उम्र, जोड़ों की चोट, मोटापा और आनुवंशिक प्रवृत्ति शामिल है। हालांकि यह एक पुरानी स्थिति है, ऑस्टियोआर्थराइटिस के प्रबंधन में जीवनशैली में बदलाव, शारीरिक उपचार, दर्द प्रबंधन और कुछ मामलों में क्षतिग्रस्त जोड़ों की मरम्मत या बदलने के लिए सर्जरी का संयोजन भी शामिल है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण क्या है ? 

  • जोड़ों में दर्द का होना। 
  • जोड़ों की गतिविधियों में कठोरता का आना। 
  • सूजन की समस्या का सामना करना।
  • सीमित गति में चल पाना। 
  • संयुक्त संवेदनशीलता। 
  • चटकने या चटकने की आवाजें। 

ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण !

  • जोड़ों की चोट के कारण है ;
  • फटे उपास्थि, लिगामेंट के फटने या विस्थापित जोड़ों का इतिहास। 
  • मोटापे की समस्या। 
  • बुढ़ापा। 
  • ख़राब शारीरिक मुद्रा और संरचना।

रूमेटाइड गठिया क्या है ?

  • दूसरी ओर, रुमेटीइड गठिया एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जहां प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से शरीर के अपने ऊतकों पर हमला करती है। यह मुख्य रूप से जोड़ों की परत (सिनोवियम) को प्रभावित करती है, जिससे सूजन होती है जो संयुक्त ऊतक को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे दर्द, सूजन और संभावित संयुक्त विकृति हो सकती है। रुमेटीइड गठिया अक्सर कई जोड़ों को सममित रूप से प्रभावित करता है, जैसे हाथ, कलाई और घुटने।
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस के विपरीत, जो उम्र के साथ अधिक आम है, रुमेटीइड गठिया किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। इसका सटीक कारण अज्ञात है, लेकिन आनुवंशिकी, हार्मोन और पर्यावरणीय कारक इसमें भूमिका निभा सकते है। रुमेटीइड गठिया के उपचार का उद्देश्य सूजन को कम करना, दर्द से राहत देना, जोड़ों की क्षति को रोकना और जोड़ों के कार्य को संरक्षित करना है। इसमें आमतौर पर दवाओं, भौतिक चिकित्सा और कभी-कभी सर्जरी का संयोजन शामिल होता है।

जोड़ों में दर्द की समस्या से बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट आर्थोपेडिक सर्जन का चयन करना चाहिए।

रुमेटीइड गठिया के कारण क्या है ?

उम्र : 

रुमेटीइड गठिया 40 से ऊपर की उम्र में आम है। 

लिंग : 

रुमेटीइड गठिया महिलाओं में अधिक आम है। 

आनुवंशिक रूप से प्रसारित। 

वजन। 

शराब पीना और सिगरेट पीना।

रुमेटीइड गठिया के लक्षण क्या है ?

  • एक से अधिक जोड़ों को प्रभावित करता है। 
  • दर्द का होना। 
  • सूजन का होना। 
  • किसी भी तरह की हलचल का महसूस ना होना। 
  • शरीर के दोनों तरफ के जोड़ का प्रभावित होना। 
  • सबसे पहले छोटे जोड़ों जैसे टखनों, कलाई आदि को प्रभावित करना। 
  • कठोरता और कोमलता। 
  • वजन का घटाना। 
  • कम हुई भूख। 
  • सूजन के परिणामस्वरूप सीने में दर्द और सूखी आँखें। 
  • पसीना आना और वजन कम का होना। 

अगर आपके एक से अधिक जोड़ें दर्द से प्रभावित है तो इसके लिए आपको लुधियाना में बेस्ट आर्थोपेडिक सर्जरी का चयन करना चाहिए।

ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटीइड गठिया में मुख्य अंतर क्या है ?

  • इन दोनों स्थितियों के बीच प्राथमिक अंतरों में से एक उनके कारणों में निहित है। ऑस्टियोआर्थराइटिस मुख्य रूप से जोड़ों पर टूट-फूट का परिणाम है, जबकि रुमेटीइड गठिया एक ऑटोइम्यून स्थिति है, जहां शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों पर हमला करती है।
  • इसके अलावा, जोड़ों पर उनका प्रभाव अलग-अलग होता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस उपास्थि के टूटने और हड्डी के स्पर्स के निर्माण का कारण बनता है, जिससे दर्द और कठोरता होती है। इसके विपरीत, रुमेटीइड गठिया के परिणामस्वरूप मुख्य रूप से जोड़ों में सूजन होती है, जिससे दर्द, सूजन और संभावित संयुक्त विकृति होती है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटीइड गठिया के इलाज के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

यदि आप ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटीइड गठिया की समस्या से खुद का बचाव करना चाहते है, तो इसके लिए आपको हुंजन हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटीइड गठिया दोनों गठिया के रूप है, लेकिन वे अपने कारणों, जोड़ों पर प्रभाव और उनके द्वारा प्रभावित जनसांख्यिकी में काफी भिन्न है। जबकि ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों की टूट-फूट से जुड़ा है, रुमेटीइड गठिया एक ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया से उत्पन्न होता है। प्रभावी निदान, प्रबंधन और उपचार रणनीतियों के लिए इन स्थितियों के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। प्रभावित लोगों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए दोनों को व्यक्तिगत देखभाल और बहु-विषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।

स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के साथ नियमित परामर्श, निर्धारित उपचारों का पालन करना और एक स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखने से लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है और इन स्थितियों के साथ रहने वाले व्यक्तियों की समग्र भलाई में सुधार हो सकता है।

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जानिए हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी का चयन क्या आपके लिए फायदेमंद है या नहीं ?

हिप यानी कूल्हे को शरीर के एक खास अंग के रूप में जाना जाता है। इसमें किसी प्रकार की परेशानी होने पर मरीज को अपने दैनिक जीवन के कामों को करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हिप में कई जॉइंट्स है। जब सभी जॉइंट्स सही से काम करते है, तो हिप स्वस्थ होता है और अच्छी से कार्य करता है। वहीं हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी जिसको लेकर बहुत से लोगों के दिमाग में ये बात घूमती है की क्या इस सर्जरी का चयन करना सही होगा या फिर इसको करवाने से पहले किन बातों का पता हमे होना चाहिए आदि। तो इस सर्जरी को करवाने से पहले किन सावधानियों को बरते इस पर खास ध्यान दें ;

क्या है हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी ?

  • हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की बात करें तो ये एक सर्जिकल प्रक्रिया है जो एक ऑर्थोपेडिक सर्जन के द्वारा पूरा किया जाता है। इस सर्जरी के दौरान सर्जन हिप यानी कूल्हे में हुए फ्रैक्चर और क्षतिग्रस्त जोड़ को प्रोस्थेटिक हिप के साथ बदल देते है। 
  • वहीं प्रोस्थेटिक हिप को प्रोस्थेसिस भी कहा जाता है। एक्सीडेंट या किसी प्रकार के तेज चोट के कारण कुल्हा फ्रैक्चर हो सकता है।
  • इसके अलावा, बुढ़ापे के कारण जब किसी व्यक्ति को उठने, बैठने, लेटने या दैनिक जीवन के कामों को करने में दर्द होता है, तो उसे कम करने के लिए इस सर्जरी का उपयोग किया जाता है। 
  • हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी एक बड़ी सर्जिकल प्रक्रिया है। इसका सुझाव केवल तभी दिया जाता है, जब दवाओं, फिजियोथेरेपी या स्टेरोइड इंजेक्शन से दर्द कम नहीं होता है।

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी को कैसे किया जाता है ?

  • हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी को शुरू करने से एक दिन पहले डॉक्टर मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती करते है। उसके बाद, डॉक्टर मरीज की जांच करते है। जांच के बाद एनेस्थीसिया दिया जाता है। सामान्य एनेस्थीसिया के बाद मरीज बेहोश हो जाते है, जबकि लोकल एनेस्थीसिया के बाद मरीज जगे हुए होते है, लेकिन उनके शरीर का वह हिस्सा सुन्न कर दिया जाता है, जिसकी सर्जरी करनी होती है।
  • उसके बाद, डॉक्टर सर्जरी की प्रक्रिया शुरू करते है। हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी को दो तरह से किया जा सकता है। 
  • इसमें पहला ओपन सर्जरी यानि कन्वेंशनल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी है।  
  • और दूसरा मिनिमल इनवेसिव हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी है।
  • वहीं कन्वेंशनल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के दौरान सर्जन मरीज के कुल की साइड पर एक 5 से 10 इंच लंबा चीरा लगाते है। फिर बीमारी से ग्रस्त या क्षतिग्रस्त जोड़ को बाहर निकाल कर उसकी जगह पर प्रोस्थेटिक हिप जॉइंट को जोड़ दिया जाता है।
  • तो मिनिमल इनवेसिव हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के दौरान एक छोटा सा चीरा लगाया जाता है। इस चीरे को विशेष रूप से तैयार किए गए उपकरण से लगाया जाता है। यह हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी का सबसे सुरक्षित और सटीक तरीका है। इस सर्जरी के बाद मरीज को कम से कम दर्द की प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है।
  • सर्जरी खत्म होने के बाद मरीज को रिकवरी रूम में शिफ्ट कर दिया जाता है, ताकि मरीज को किसी तरह की कोई परेशानी न हो।

अगर आपके हिप के जोड़ में किसी भी तरह की समस्या आ गई है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में सर्वश्रेष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन का चयन करना चाहिए।

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी को क्यों किया जाता है ?

  • घुटने के दर्द से निजात पाने के लिए। 
  • सीढ़ियों को चढ़ने में परेशानी आने पर इस सर्जरी का चयन किया जाता है।
  • जोड़ों में अकड़न आने पर भी आप इस सर्जरी का चयन कर सकते है। 
  • बढ़ती उम्र के कारण होने वाली समस्याएं ज्यादा न बढ़े तो ऐसे में भी आप इस सर्जरी का चयन कर सकते है। 
  • कूल्हे के जोड़ के अंदर परिवर्तन आने पर भी आप इस सर्जरी का चयन कर सकते है।

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी से पहले किन बातों का रखें खास ध्यान !

  • हिप बदलने की सर्जरी की कोई निर्धारित उम्र या इसका वजन से कोई मतलब नहीं होता है। डॉक्टर आपकी समस्या और स्वास्थ्य की स्थिति और जरूरत के आधार पर हिप रिप्लेसमेंट की सलाह दे सकते है। 
  • हिप रिप्लेसमेंट के मरीज आमतौर पर 50 से 80 साल की उम्र के बीच देखे जाते है, लेकिन ऑर्थोपेडिक सर्जन इस सर्जरी के लिए मरीजों की व्यक्तिगत स्थिति पर ज्यादा जोर देते है।

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के फायदे क्या है ?

  • इस सर्जरी का चयन अगर आप करते है, तो आप दर्द से राहत पा सकते है।   
  • इस सर्जरी की सफलता दर भी उच्च है। 
  • सर्जरी के बाद आप बेहतर ताकत और गतिशीलता का अनुभव करते है। 
  • लंबे समय तक चलने वाली सर्जरी मानी जाती है ये। 
  • जीवन की उन्नत गुणवत्ता के लिए मानी जाती है ये सर्जरी।

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की जटिलताएं क्या देखने को मिलती है ?

  • सर्जरी के बाद आपके पैरों में खून के थक्के जम सकते है। 
  • कुछ मामलों में इस सर्जरी के बाद आपको संक्रमण होने का खतरा भी बन सकता है। 
  • फ्रैक्चर की समस्या भी हो सकती है। 
  • कुछ मामलों में हिप रिप्लेसमेंट के दौरान नए जोड़ की बॉल सॉकेट से बाहर आ जाते है, खासकर सर्जरी के बाद पहले कुछ महीनों में। 
  • पैर की लंबाई में बदलाव भी आ सकता है। 
  • इंप्लांट का ढीला होना। 
  • इस सर्जरी में नसों को क्षति भी पहुंच सकती है।

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद कैसे रखें खुद का ध्यान ?

  • किसी भी गतिविधि के दौरान अपने कूल्हे को 90° से अधिक झुकाने से बचें। 
  • अपने कूल्हे को मोड़ने से बचें। 
  • जब आप मुड़ें तो छोटे कदम उठाएं। 
  • प्रारंभिक अवस्था में घाव पर दबाव न डालें। 
  • अपने पैरों को एक दूसरे के ऊपर से पार न करें। 
  • अपने कूल्हे को मजबूर न करें या ऐसा कुछ भी न करें जिससे वह असहज महसूस करे। 
  • नीची कुर्सियों और शौचालय सीटों से बचें। 
  • गिरने से खुद को बचाए। 
  • सर्जरी को करवाने से पहले, अपने घर को पुनर्व्यवस्थित करें। अभी परिवर्तन करना महत्वपूर्ण है ताकि जब आप अस्पताल से वापस आएँ तो सब कुछ तैयार हो जाए। और आपको किसी भी तरह की समस्या का सामना भी न करना पड़े।
  • सुनिश्चित करें कि आपके घर में वॉकर या बैसाखी के साथ घूमना आसान हो। ढीले गलीचे जैसे संभावित ट्रिपिंग खतरों को हटा दें। ये कुछ काम ऐसे है, जो आपको सर्जरी से पहले करने बहुत जरूरी है।

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की लागत क्या है ?

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की लागत 2 लाख 80 हजार रुपये से लेकर साढ़े 5 लाख 50 हजार रुपये तक हो सकती है। वहीं यह लागत इस पर भी निर्भर करती है कि आप किस शहर में, किस डॉक्टर से और किस संस्थान में अपना इलाज करा रहे है।

आप चाहे तो इस सर्जरी को किफायती दाम में हुंजन हॉस्पिटल से भी करवा सकते है।

निष्कर्ष :

हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी का चयन करने से पहले आपको किन बातों का पता होना चाहिए, इसके बारे में हमने इस छोटे से लेख में प्रस्तुत किया है, तो इस सर्जरी का चयन करने से पहले अपने डॉक्टर से भी जरूर सलाह लें।

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घरेलु उपाय की मदद से हम कैसे कमर दर्द की समस्या से पा सकते है निजात ?

पीठ दर्द कई व्यक्तियों के लिए एक स्थायी और दुर्बल करने वाली समस्या हो सकती है। जबकि गंभीर मामलों के लिए चिकित्सीय सलाह लेना आवश्यक है, ऐसे कई घरेलू उपचार है, जो असुविधा को कम करने और इस सामान्य बीमारी से राहत दिलाने में सहायता कर सकते है, उसके बारे में चर्चा करेंगे ;

कमर दर्द से राहत दिलवाने के लिए घरेलु उपचार !

गर्म और ठंडी चिकित्सा :

गर्म और ठंडे सेक को बारी-बारी करने से पीठ दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है। दर्द का अनुभव होने के शुरुआती 48 घंटों के दौरान दिन में कई बार लगभग 20 मिनट के लिए कोल्ड पैक लगाएं। बाद में, मांसपेशियों को आराम देने और प्रभावित क्षेत्र में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने के लिए हीटिंग पैड या गर्म तौलिये का उपयोग करें।

नियमित व्यायाम :

पैदल चलना, तैराकी या योग जैसे कम प्रभाव वाले व्यायामों में शामिल होने से पीठ की मांसपेशियाँ मजबूत हो सकती है और लचीलेपन में सुधार हो सकता है। सरल स्ट्रेचिंग दिनचर्या मांसपेशियों में तनाव को कम कर सकती है और भविष्य में दर्द के जोखिम को कम कर सकती है।

उचित मुद्रा बनाए रखें :

अपनी मुद्रा के प्रति सचेत रहना, चाहे बैठे हों या खड़े हों, महत्वपूर्ण है। बैठते समय अपनी कमर को अच्छी कमर के सहारे वाली कुर्सियों का उपयोग करके सहारा दें और सुनिश्चित करें कि आपकी कंप्यूटर स्क्रीन आंखों के स्तर पर हो ताकि झुकने से बचा जा सके। खड़े होते समय, अपना वजन दोनों पैरों पर समान रूप से वितरित करें और अपने घुटनों को लॉक करने से बचें।

एर्गोनोमिक समायोजन :

अपने वातावरण में एर्गोनोमिक परिवर्तन करें, जैसे अपने कार्य डेस्क की ऊंचाई को समायोजित करना, एक सहायक कुर्सी का उपयोग करना, और अपने कंप्यूटर या कार्य सामग्री को आसान पहुंच के भीतर रखना। इससे पीठ पर तनाव काफी हद तक कम हो सकता है।

सोने की आदतें :

आपका गद्दा और सोने की स्थिति पीठ के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। एक गद्दा जो पर्याप्त समर्थन और आराम प्रदान करता है, महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, उचित संरेखण बनाए रखने के लिए अपने घुटनों के बीच एक तकिया रखकर करवट लेकर सोने का प्रयास करें।

हर्बल उपचार और पूरक :

कुछ व्यक्तियों को हल्दी, अदरक जैसे हर्बल उपचार या मैग्नीशियम और मछली के तेल जैसे पूरकों के माध्यम से राहत मिलती है। इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते है, जो पीठ दर्द को कम कर सकते है।

मसाज थैरेपी :

मालिश से मांसपेशियों का तनाव कम हो सकता है और प्रभावित क्षेत्र में रक्त का प्रवाह बेहतर हो सकता है। अतिरिक्त आराम और दर्द से राहत के लिए आवश्यक तेलों या बाम का उपयोग करें।

अगर आपको मांसपेशियों में किसी भी तरह की दिक्कत आए तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट आर्थोपेडिक सर्जन का चयन करना चाहिए। 

मन-शरीर तकनीकें :

ध्यान, गहरी साँस लेना और योग जैसे अभ्यास न केवल मन को आराम देते है, बल्कि मांसपेशियों के तनाव को भी कम करते है और तनाव को कम करते है, जो अक्सर पीठ दर्द से जुड़े होते है।

जलयोजन और पोषण :

पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और सूजन-रोधी खाद्य पदार्थों से भरपूर संतुलित आहार बनाए रखने से समग्र स्वास्थ्य में मदद मिल सकती है और संभावित रूप से पीठ दर्द कम हो सकता है।

गतिहीन व्यवहार को सीमित करना :

लंबे समय तक बैठे रहना या निष्क्रियता पीठ दर्द में योगदान कर सकती है। नियमित ब्रेक लें, हर घंटे खड़े रहें और स्ट्रेच करें और मूवमेंट को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

यदि आप गंभीर गंभीर कमर दर्द की समस्या का सामना कर रहें है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट आर्थोपेडिक सर्जरी का चयन करना चाहिए, लेकिन इस सर्जरी का चयन करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

सुझाव :

हालांकि ये घरेलू उपचार हल्के से मध्यम पीठ दर्द से राहत दे सकते है, लेकिन अगर दर्द बना रहता है या बिगड़ जाता है तो स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है। पुरानी या गंभीर पीठ समस्याओं के लिए, चिकित्सीय सलाह लेना आवश्यक है। हालाँकि, इन सरल लेकिन प्रभावी घरेलू उपचारों को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने से असुविधा को कम करने और समय के साथ एक स्वस्थ व्यक्ति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।

याद रखें :

इन प्रथाओं को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने से पीठ दर्द को प्रबंधित करने और कम करने में काफी अंतर आ सकता है, जिससे आप अधिक आरामदायक और सक्रिय जीवनशैली का आनंद ले सकते है।

वहीं अगर आप गंभीर कमर दर्द की समस्या से परेशान है तो इससे बचाव के लिए आपको हुंजन हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

और साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें की किसी भी तरह के उपाय को अपनाने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। 

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कण्डरा (टेंडर) और स्नायुबंधन के बीच क्या अंतर है ?

टेंडन और लिगामेंट्स हमारे मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम के दो आवश्यक घटक माने जाते है, जो हमारे शरीर में विशिष्ट लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम टेंडन और लिगामेंट्स के बीच अंतर का पता लगाएंगे, और साथ ही हमारे शरीर में उनके कार्यों और स्थानों पर भी प्रकाश डालेंगे ;

कण्डरा या टेंडन क्या है ?

  • टेंडन कठोर, रेशेदार संयोजी ऊतक होते है, जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते है। वे मजबूत रस्सियों की तरह है, जो मांसपेशियों द्वारा उत्पन्न बल को हड्डियों तक पहुंचाती है, जिससे हमें अपने अंगों को हिलाने और विभिन्न गतिविधियां करने की अनुमति मिलती है। 
  • टेंडन हमारे पूरे शरीर में, सिर से पैर तक पाए जाते है, और वे अपने स्थान के आधार पर विभिन्न आकार में आते है।
  • टेंडन के बारे में ध्यान देने योग्य एक महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें तनाव और खिंचाव का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो उन्हें टिकाऊ और लचीला बनाता है। इन्हें बंजी डोरियों के रूप में सोचें जो मांसपेशियों को बिना टूटे या टूटे हड्डियों पर खींचने में मदद करती है।

स्नायुबंधन क्या है ?

  • दूसरी ओर, स्नायुबंधन भी रेशेदार संयोजी ऊतक होते है, लेकिन उनका प्राथमिक कार्य हड्डियों को अन्य हड्डियों से जोड़ना होता है। टेंडन के विपरीत, स्नायुबंधन मांसपेशियों से नहीं जुड़ते है। इसके बजाय, वे जोड़ों को स्थिरता प्रदान करते है और अत्यधिक गति या हाइपरेक्स्टेंशन को रोकते है। 
  • स्नायुबंधन हमारे जोड़ों की संरचनात्मक अखंडता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण निभाते है। लेकिन जोड़ों में किसी भी तरह की समस्या होने पर आपको इसके बचाव के लिए लुधियाना में बेस्ट आर्थोपेडिक सर्जन का चयन करना चाहिए।
  • स्नायुबंधन को मजबूत पट्टियों के रूप में कल्पना करें जो दो आसन्न हड्डियों को एक साथ पकड़ते है, जिससे जोड़ को गति की अपनी सुरक्षित सीमा के भीतर चलने की अनुमति मिलती है। जैसे की, घुटने में पूर्वकाल क्रूसिएट लिगामेंट (एसीएल) दौड़ने और कूदने जैसी गतिविधियों के दौरान टिबिया (शिनबोन) को फीमर (जांघ की हड्डी) के सापेक्ष बहुत आगे खिसकने से रोकता है।

इन दोनों के बीच अंतर का सारांश क्या है ?

कार्य : 

  • टेंडन मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते है, जिससे गति में सुविधा होती है।
  • जबकि स्नायुबंधन हड्डियों को अन्य हड्डियों से जोड़ते है, जिससे जोड़ों को स्थिरता मिलती है।

स्थान : 

  • टेंडन मांसपेशियों के सिरों पर पाए जाते है, जो मांसपेशियों और हड्डी के बीच की दूरी को फैलाते है। 
  • वहीं स्नायुबंधन जोड़ों के आसपास पाए जाते है, जो एक हड्डी को दूसरी हड्डी से जोड़ते है। 

दो हड्डियों को आपस में जोड़ने के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट आर्थोपेडिक सर्जरी का चयन करना चाहिए।

संरचना : 

  • कण्डरा और स्नायुबंधन दोनों कोलेजन फाइबर से बने होते है, लेकिन कंडरा सघन होते है और अधिक तनाव का सामना कर सकते है। 
  • जबकि स्नायुबंधन नियंत्रित संयुक्त गति की अनुमति देने के लिए अधिक लोचदार होते है।

चोट : 

  • मांसपेशियों की गति में उच्च-तनाव की भूमिका के कारण टेंडन में खिंचाव और फटने जैसी चोटों का खतरा अधिक होता है। 
  • इसके उलट स्नायुबंधन में मोच आने की संभावना अधिक होती है, जो अक्सर तब होती है जब जोड़ मुड़ जाते है या अधिक खिंच जाते है।

उपचार : 

  • टेंडन में आमतौर पर स्नायुबंधन की तुलना में धीमी उपचार प्रक्रिया होती है। टेंडनों को रक्त की आपूर्ति सीमित होती है, जिससे उनके ठीक होने में अधिक समय लगता है।

जैसे – कण्डरा का एक उदाहरण एच्लीस कण्डरा है, जो पिंडली की मांसपेशियों को एड़ी की हड्डी से जोड़ता है। 

वहीं लिगामेंट में पेटेलर लिगामेंट है, जो नीकैप (पटेला) को शिनबोन (टिबिया) से जोड़ता है।

जोड़ों की हड्डी के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

अगर आप जोड़ों में दर्द या किसी भी अन्य जोड़ों से संबंधित गंभीर समस्या से ग्रस्त है, तो इससे बचाव के लिए आपको हुंजन हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए।

ध्यान रखें :

अगर आप हड्डियों से जुडी किसी गंभीर समस्या का सामना कर रहें है, तो इससे बचाव के लिए आपको अपने जोड़ों को अव्यवस्थित तरीके से मोड़ने से बचें और साथ ही अपने खाने-पीने का अच्छे से ध्यान रखें। 

निष्कर्ष :

कंडरा और स्नायुबंधन शरीर के भीतर विभिन्न कार्यों और स्थानों के साथ विशिष्ट मिलनसार ऊतक है। टेंडन मांसपेशियों के बल को हड्डियों तक पहुंचाते है, जिससे गति संभव होती है, जबकि स्नायुबंधन हड्डियों को एक दूसरे से जोड़कर जोड़ों को स्थिरता प्रदान करते है। चोटों को रोकने, समग्र मस्कुलोस्केलेटल स्वास्थ्य को बनाए रखने और जटिल तंत्र की सराहना करने के लिए इन अंतरों को समझना महत्वपूर्ण है जो हमें दैनिक रूप से चलने और कार्य करने की अनुमति देते है। तो, अगली बार जब आप अपनी मांसपेशियों को मोड़ें या कोई कदम उठाएं, तो याद रखें कि इन क्रियाओं में टेंडन और लिगामेंट्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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Hindi hip replacement surgery

पीठ के निचले हिस्से में हर्नियेटेड डिस्क का होना क्या है ?

आपकी रीढ़ की हड्डी को बनाने वाली 26 हड्डियों, जिन्हें हम कशेरुक कहते है, में प्रत्येक के बीच में डिस्क होती है। और ये डिस्क जेली जैसे पदार्थ से बनी होती है और आपकी रीढ़ के लिए कुशन की तरह कार्य करती है। वहीं हर्नियेटेड डिस्क तब होती है, जब डिस्क का पूरा हिस्सा या पूरा भाग रीढ़ की हड्डी के कमजोर हिस्से से होकर गुजरता है। इससे आसपास की नसों या रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा हर्नियेटेड डिस्क का हमारे रीढ़ की हड्डी के साथ कैसा संबंध है इसके बारे में चर्चा करेंगे ;

हर्नियेटेड डिस्क क्या है ?

  • हर्नियेटेड डिस्क या स्लिप्ड डिस्क गर्दन से लेकर पीठ के निचले हिस्से तक रीढ़ के किसी भी हिस्से में हो सकती है। हर्नियेटेड डिस्क के लिए पीठ का निचला हिस्सा सबसे आम क्षेत्र माना जाता है। 
  • एक हर्नियेटेड डिस्क में, एनलस टूट जाता है और फट जाता है जिसके कारण नरम नाभिक पल्पोसस तंत्रिकाओं को संकुचित करते हुए, एनलस से बाहर निकलने का एक तरीका ढूंढता है। 
  • हर्नियेटेड डिस्क एक न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है जिसमें एनलस खराब हो जाता है, या टूट जाता है, जिससे न्यूक्लियस पल्पोसस के एक टुकड़े को बाहर धकेल दिया जाता है और रीढ़ की हड्डी से निकलने वाली नसों को दबा दिया जाता है।

हर्नियेटेड डिस्क के लक्षण क्या नज़र आते है ?

  • शरीर के एक हिस्से में दर्द और सुन्नता का होना। 
  • दर्द बाहों या पैरों तक फैल रहा है। 
  • दर्द रात में या कुछ हरकतों से बढ़ जाता है। 
  • दर्द खड़े होने या बैठने के बाद बढ़ जाता है। 
  • कम दूरी का रास्ता तय करने पर दर्द का होना।  
  • मांसपेशियों में कमजोरी का आना। 
  • प्रभावित क्षेत्र में झुनझुनी, दर्द या जलन जैसा महसूस होना आदि।

अगर आपके शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द है या दर्द के कारण आपके हड्डियों में भी परेशानी आ रहीं है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट आर्थोपेडिक सर्जन का चयन करना चाहिए। 

हर्नियेटेड डिस्क के कारण क्या है ?

  • किसी वस्तु को उठाने के लिए घुमना या मुड़ना।
  • बहुत बड़ी, भारी वस्तु उठाने से पीठ के निचले हिस्से पर दबाव का पड़ जाना। 
  • शारीरिक रूप से कठिन जॉब करने वाले भी इस तरह की समस्या से ग्रस्त हो सकते है। 
  • दुर्घटनाएं या अन्य बाहरी या अंधरुनि चोट का लगना। 
  • अधिक वजन उठाने के कारण समस्या का सामना करना। 
  • कमजोर मांसपेशियों की समस्या का सामना करना। 
  • आसन्न जीवन शैली को अपनाना।

पीठ के नीचने हिस्से में दर्द के कारण अगर आपको हिप को बदलवाने की सर्जरी का सहारा लेना पड़े तो सबसे पहले हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की लागत क्या है इसके बारे में जरूर जानकारी हासिल करें। 

हर्नियेटेड डिस्क में खराबी का पता किस तरीके से लगया जा सकता है ?

  • किसी भी तरह के दर्द और परेशानी के स्रोत का पता लगाने के लिए शारीरिक परीक्षण किया जाता है। वहीं इसमें तंत्रिका कार्यों और मांसपेशियों की ताकत की जांच करना भी शामिल होता है, और प्रभावित क्षेत्र को हिलाने या छूने पर दर्द महसूस होता है। 
  • एक्स-रे किसी भी हड्डी की समस्या को दिखाने में मदद कर सकता है और इस तरह समान लक्षणों वाली अन्य स्थितियों को दूर कर सकता है। 
  • चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (MRI) स्कैन डिस्क के स्थान और प्रभावित तंत्रिकाओं को दिखाने में मदद करता है।
  • डिस्कोग्राम में डिस्क के केंद्र में डाई इंजेक्ट करना शामिल है, यह डिस्क में दरारें दिखाने में मदद करता है। यह दर्शाता है कि हर्नियेटेड डिस्क रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं पर कोई दबाव तो नहीं डाल रही है।

हर्नियेटेड डिस्क का उपचार कैसे किया जाता है ?

हर्नियेटेड डिस्क का इलाज शुरू में दर्द और सूजनरोधी दवाओं के साथ आराम की अवधि के साथ किया जाता है। आपकी स्वास्थ्य देखभाल टीम दर्द को कम करने और आपकी गति की सीमा में सुधार करने में मदद करने के लिए भौतिक चिकित्सा का सुझाव भी आपको दिया जाता है। यदि दर्द और अन्य लक्षण बने रहते है, तो आपकी स्वास्थ्य देखभाल टीम डिस्क के हर्नियेटेड हिस्से को हटाने के लिए सर्जरी की सिफारिश करेगी।

वहीं सर्जरी की मदद से आपके हर्नियेटेड डिस्क में जो भी दर्द या अन्य समस्या है उसको खत्म किया जा सकता है। 

सुझाव :

हर्नियेटेड डिस्क में अगर किसी भी तरह की समस्या नजर आए तो इससे बचाव के लिए आपको हुंजन हॉस्पिटल के अनुभवी डॉक्टरों एक चयन करना चाहिए और किसी भी तरह की समस्या अगर आपको शुरुआती दौर में नज़र आए तो इससे बचाव के लिए आपको डॉक्टर की मदद जरूर लेनी चाहिए।

निष्कर्ष :

हर्नियेटेड डिस्क कमर के निचले हिस्से के साथ संबंधित है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की समस्या अगर नज़र आए तो इससे बचाव के लिए आपको डॉक्टर का चयन करना चाहिए, क्युकी इसमें अगर सामान्य सी भी समस्या आ गई तो इसका पूरा असर हमारे सम्पूर्ण शरीर पर जरूर पड़ेगा। इसके अलावा हर्नियेटेड डिस्क के लक्षणों पर भी खास नज़र रखें। और किसी भी तरह के उपाय या दवाई को अपनाने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

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बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन (BJI) जॉइन्ट्स के दर्द और इंफेक्श से जुड़ी बीमारी क्या है?

आज के समय की बात की जाए तो जोड़ो में दर्द का होना कोई बड़ी बात नहीं है, क्युकि स्वास्थ्य और संतुलित खाने की आज के समय में काफी कमी आ चुकी है जिस वजह से लोगों में ये समस्या देखने को मिल रहीं है। वही आज के लेख में हम बात करेंगे की आखिर क्या है बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन और इसके होने पर व्यक्ति को किस तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है और साथ ही इस तरह की समस्या से कैसे हम खुद का बचाव कर सकते है;

क्या है बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन ?

  • यदि आपके जोड़ो में दर्द की समस्या ज्यादा बनी हुई है, तो समझ ले की आप बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन की समस्या से जूझ रहे है जिसे शार्ट कट में समझा जाए तो BJI भी कहा जाता है।
  • वही इस दौरान जोड़ों में असहनीय दर्द एवं सूजन की समस्या शुरू हो जाती है, जिससे इंफेक्शन की समस्या की भी शुरूआत होती है। बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन (BJI) होने पर मसल्स और बोन दोनों को नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा अगर आपके द्वारा बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन का इलाज ठीक से ना करवाया जाए, तो जॉइन्ट डिसेबिलिटी या सेप्टिक शॉक का खतरा बढ़ सकता है।

अगर आप भी जोड़ों में दर्द की समस्या से जूझ रहें है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना के बेस्ट ओर्थपेडीक का चयन करना चाहिए।

कारण क्या है बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन (BJI) के?

  • स्ट्रेप्टोकोकस के कारण।
  • स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया का कारण।
  • निसेनोरिया गोनोरेहिया का कारण।
  • स्टेप इंफेक्शन का होना भी इसके एक कारण में शामिल है।
  • बोरेलिया बर्गडॉर्फिरी का कारण।

किन लोगों में बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन (BJI) का खतरा सबसे अधिक रहता है !

  • जिन्होंने जॉइन्ट सर्जरी करवाई हो।
  • आर्टिफिशियल इम्प्लांट करवाया हो।
  • जिन्हे इम्यून सिस्टम से जुड़ी परेशानी हो।
  • जिन्हे गाउट की समस्या हो।
  • सोरायसिस या एक्जिमा की समस्या।
  • त्वचा का अत्यधिक पतला होना या घाव का लगना।
  • मसूड़ों से जुड़ी समस्या हो जिन्हे।
  • डायबिटीज मेलिटस की समस्या का सामना करने वाले।
  • यूरिनरी इंफेक्शन का सामना कर रहे लोग भी इस समस्या का सामना कर सकते है।

बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन के लक्षण क्या है ?

  • बॉडी का टेम्प्रेचर सामान्य से ज्यादा होना।
  • जोड़ों की त्वचा का रात के वक्त गर्म होना।
  • जोड़ों में दर्द का होना।
  • जोड़ों में सूजन की समस्या का होना।
  • भूख न लगना।
  • थकान महसूस करना।
  • वही युवाओं में दर्द की बात की जाए तो उनमे बाजुओं के जॉइन्ट्स में दर्द का होना।
  • पैरों के जोइंट्स में दर्द का होना।
  • घुटने में दर्द का होना।
  • पीठ और गर्दन में दर्द का महसूस होना।

बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन का इलाज कैसे किया जाता है ?  

इसके इलाज को अनुभवी डॉक्टरों के द्वारा निम्न तरीके से किया जाता है, जैसे ; 

  • अगर जोड़ों में दर्द की परेशानी आपको शुरुआती तौर पर है, तो ऐसे में डॉक्टर आपको ओरल एंटीबायोटिक मेडिसिन लेने की सलाह देते है।
  • अगर किसी व्यक्ति को बैक्टीरियल जॉइन्ट इन्फ्लेमेशन (BJI) की समस्या ज्यादा है, तो डॉक्टर ऐसे में पेशेंट के नसों में एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगाते है। 
  • वहीं अगर आपको ये समस्या पूरानी है, तो आपको सर्जरी का सहारा लेना पड़ सकता है।
  • अगर आप अपने जोड़ो में दर्द की समस्या की वजह से बहुत ज्यादा परेशान है तो इससे बचाव के लिए आपको इसके लक्षण शुरुआती दौर पर दिखाई देने पर ही हुंजन हॉस्पिटल के डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

जोड़ों में दर्द की समस्या को व्यक्ति को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्युकि अगर हम इसके शुरुआती लक्षण नज़र आने पर इसका इलाज करवाते है तो हमें काफी फ़ायदा देखने को मिलता है और साथ ही हमे सर्जरी का भी सहारा नहीं लेना पड़ता और हम जोड़ों के दर्द की समस्या से खुद का बचाव आसानी से कर पाते है।