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ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी से हो सकती है हड्डियां खोखली, पुरुष भी हो रहे है इस समस्या से शिकार

ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक किस्म की बीमारी है, जिसमें हड्डियां खोखली होने लग जाती है | इस समस्या से शरीर के हर अंग से हड्डियों के जोड़ खुलने लगते है, जिसकी वजह से हड्डियां कमज़ोर होने लगती है और इसी के साथ ही हड्डियों के टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है | ऑस्टियोपोरोसिस के अधिकतर मरीज महिलायें या फिर अधेड़ उम्र के लोगों को ही होती थी, लेकिन बीतें कुछ वर्षों से ऑस्टियोपोरोसिस के मामले पुरुषों में भी पाए जा रहे है और साथ ही इसका स्तर तेज़ी से बढ़ता भी जा रहा है | 

 

हुन्जुन हॉस्पिटल के सीनियर डॉक्टर बलवंत सिंह हुन्जुन जो की ऑर्थोपेडिक सर्जन में एक्सपर्ट है, उन्होंने ने यह बताया की कैसे अब पुरुष भी ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी के चपेट में आ रहे है और कैसे इस समस्या का इलाज किया जा सकता है | उससे पहले यह जान ले की ऑस्टियोपोरोसिस क्या होती है | आइए जानते है ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी के बारे में विस्तार पूर्वक से :- 

 

ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी क्या है ? 

 

ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी से हड्डियों में मौजूद घनत्व कम होने लग जाता है, जिसकी वजह से हड्डियां अंदर से कमज़ोर होने लग जाती है | समस्या के ज्यादा बढ़ने पर हड्डियां कभी भी चटक सकती है | अगर सही समय इलाज न किया गया तो इससे इंसान अपाहिज तक हो सकता है | 

 

ऑस्टियोपोरोसिस किन गंभीर बीमारियों की वजह से बन रही है ?    

 

पिछले बीते कुछ सालों में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या तेज़ी से बढ़ते जा रही है | इसकी असली वजह लोगों की बदलती  जीवनशैली है | दरअसल जब किसी व्यक्ति को कोई गंभीर बीमारी जैसे की डॉयबटीज, कार्डियक डिजीज, एप्लेप्सी, गठिया या फिर आर्थराइटिस की समस्या से गुज़र रहे होते है तब यह बीमारी बहुत जल्दी ट्रिगर कर जाती है |  

 

नशीली पदार्थों के सेवन से भी हो जाती है यह बीमारी ? 

 

यदि आप लगातार ज्यादा मात्रा में शराब और धूम्रपान करते है तो इससे भी आप ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी का शिकार हो सकते है | इसके साथ ही अगर आप हाई रिस्क वाली दवाइयों का सेवन कर रहे है तो इसकी वजह से भी ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या हो जाती है |   

 

ऑस्टियोपोरोसिस से कैसे करें अपना बचाव ? 

 

ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए बेहतर डाइट का सेवन करें | सबसे पहले अपनी डाइट में डेयरी से बने प्रोडक्ट्स या फिर दूध को दिन में दो बार शामिल करें | विटामिन डी का भी अंतर्ग्रहण कम नहीं होना चाहिए, इसे आप कैप्सूल के रूप में भी ले सकते है और इसी के साथ ही सूरज की रौशनी मिलनी भी ज़रूरी है | 

 

एक्सरसाइज से होती है हड्डियां मजबूत

 

यदि आप अपने हड्डियों की मजबूती को बरकरार रखना चाहते है तो इसके लिए आपको अपने डेली लाइफस्टाइल में हेअल्थी डाइट के साथ-साथ एक्सरसाइज को भी शामिल करें | डेली फिजिकल एक्टिविटी से हड्डियां मजबूत होती है | 

 

इससे संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए आप हुन्जुन हॉस्पिटल से परामर्श कर सकते है | यहाँ के डॉक्टर  बलवंत सिंह हुन्जुन ऑर्थोपेडिक सर्जन में स्पेशलिस्ट है जो इस समस्या से आपको छुटकारा दिलाने में मदद कर सकते है 

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आराम से यात्रा: गाड़ी चलाते समय पीठ दर्द को कम करने के लिए युक्तियाँ

“ड्राइविंग एक मुक्तिदायक अनुभव होना चाहिए, लेकिन कई लोगों के लिए, यह एक दर्दनाक परीक्षा बन जाती है। चाहे वह लंबी यात्रा के बाद होने वाला हल्का दर्द हो या सड़क पर हर टक्क्र के साथ तेज झटके, ड्राइविंग के दौरान पीठ दर्द हो सकता है छोटी- छोटी यात्राओं के भी असुविधाजनक यात्राओं में बदल दें। ड्राइविंग, जिसे अक्सर एक सांसारिक गतिविधि के रूप में देखा जाता है, आश्चर्यजनक रूप से विभिन्न प्रकार की असुविधा पैदा कर सकता है, खासकर पीठ में।

ड्राइविंग के दौरान पीठ दर्द कई कारकों के कारण हो सकता है, जिनमें शामिल है: 

    • खराब मुद्रा: गाड़ी चलाते समय लंबे समय तक झुककर या झुककर बैठने से पीठ की मांसपेशियों और स्नायुबंधन पर दबाव पड़ सकता है, जिससे असुविधा और दर्द हो सकता है। 
    • काठ समर्थन की कमी: कई कार सीट पीठ के निचले हिस्से(काठ छेत्र) के प्राकृतिक वक्र के लिए पर्याप्त समर्थन प्रदान नहीं करती है। समर्थन  की कमी के परिणामस्वरूप रीढ़ और आसपास की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे दर्द हो सकता है।
    • कंपन और झटका: ड्राइविंग करते समय अनुभव होने वाला कंपन और झटका, विशेष रूप से उबड़-खाबड़ सड़कों या ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर, मौजूद पीठ की समस्याओं को बढ़ा सकता है या नई असुविधा पैदा कर सकता है।
    • लंबे समय तक बैठे रहना: पर्याप्त ब्रेक के बिना लंबे समय तक बैठे रहने से पीठ में अकड़न और मांसपेशियों में थकान हो सकती है, जिससे दर्द और असुविधा हो सकती है।
    • गलत सीट स्थिति: सीट की स्थिति को गलत तरीके से समायोजित करना, जैसे कि सीट को बहुत पीछे रखना या बहुत अधिक झुकना, पीठ की मांसपेशियों पर दबाव डाल सकता है और दर्द पैदा कर सकता है। 
  • अंतर्निहित रीढ़ की हड्डी की स्थिति: पहले से मौजूद रीढ़ की हड्डी की स्थिति जैसे हर्नियेटेड डिस्क, कटिस्नायुशूल, या स्पाइनल स्टेनोसिस वाले व्यक्तियों को लंबे समय तक बैठे रहने और कंपन के कारण गाड़ी चलाते समय दर्द में वृद्धि का अनुभव हो सकता है। 

गाड़ी चलाते समय पीठ दर्द से राहत पाने के लिए एर्गोनोमिक समायोजन, मुद्रा में सुधार और जीवनशैली में बदलाव का संयोजन शामिल है। गाड़ी चलाते समय पीठ दर्द से राहत पाने के लिए यहां कुछ प्रभावी रणनीतियां दी गई है: 

 

  • उचित सीट समायोजन: अपनी रीढ़ की हड्डी का उचित संरेखण सुनिश्चित करने के लिए अपनी सीट को समायोजित करें। अपनी पीठ को सीट के पीछे टिकाकर सीधे बैठे और अपने कूल्हों को जितना संभव हो पीछे की ओर रखें। यदि उपलब्ध हो तो काठ का सहारा लें या अपनी रीढ़ की हड्डी के प्राकृतिक मोड़ को बनाए रखने के लिए अपनी पीठ के निचले हिस्से के पीछे एक छोटा तकिया या लपेटा होया तौलिया रखें। 

 

  •  नियमित ब्रेक लें: लम्बी ड्राइव के दौरान टहलने और घूमने के लिए नियमित ब्रेक की योजना बनाए। हर घंटे या इसके बाद, आराम स्थल या सुरक्षित क्षेत्र पर जाएं और तनाव दूर करने और परिसंचरण में सुधार के लिए अपनी पीठ, गर्दन, कंधों और पैरों के लिए सरल स्ट्रेचिंग करें।
  • हीट थेरेपी का उपयोग करें: तनावग्रस्त मांसपेशियों को आराम देने और रक्त परिसंचरण में सुधार करने के लिए गाड़ी चलाने से पहले प्रभावित क्षेत्र पर हीट थेरेपी लागू करें। कार में बैठने से पहले 15-20 मिनट के लिए अपनी पीठ पर हीट पैक, हीटिंग पैड या गर्म तौलिये का प्रयोग करें।
  • सीट कुशन या सपोर्ट का उपयोग करें: गाड़ी चलाते समय पीठ दर्द को कम करने के लिए डिजाइन किए गए विशेष सीट कुशन या सपोर्ट का उपयोग करने पर विचार करें। यह कुशन आपकी रीढ़ और टेलबोन पर दबाव कम करने के लिए अतिरिक सहायता और कुशनिंग प्रदान कर सकता है। 
  • हाइड्रेटेड रहें और स्वस्थ आहार बनाए रखें: हाइड्रेटेड रहने के लिए खूब पानी पिएं, क्योंकि निर्जलीकरण मांसपेशियों में तनाव और कठोरता को बढ़ा सकता है। रीढ़ की हड्डी के समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए फलों, सब्जियों, लीन प्रोटीन और साबुत अनाज से भरपूर संतुलित आहार बनाए रखें।

यदि इन उपायों के बावजूद पीठ दर्द बना रहता है, तो अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप व्यक्तिगत सलाह और उपचार विकल्पों के लिए किसी भौतिक चिकित्सक या हाड वैद्य जैसे स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर हुंजन हस्पताल लुधियाना से परामर्श करने पर विचार करें।

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A Comprehensive And Brief Note To Understand Everything About Shoulder Surgery

Shoulder surgeries are very common in the United States. More than 80,000 people get these surgeries done every year. Shoulder replacement surgery is also known as shoulder arthroplasty. The shoulder is the ball socket for all joints. When you feel any minor symptom, you should go to an orthologist. The head of the upper arm bone is fixed into this socket, which moves the arm.

Shoulder replacement surgery

Shoulder surgery is also called shoulder arthroplasty. The damaged part of the shoulder is removed, and the metal pieces are inserted to cure the pain in the shoulder. The shoulder is a ball socket joint. The head of the bone fits in the socket. The joint of the shoulder is responsible for the movements. It is an essential joint of the body.   

Reasons for the shoulder replacement

There are many reasons to get shoulder replacement surgery done. This surgery can give you relief from pain. The reason for the replacement of the shoulder.

  • Wear-and-tear arthritiswear-and-tear arthritis is called Osteoarthritis, And it damages the cartilage. The ends of bones are covered with cartilage. It is helpful for smooth joint movement.
  • Injuries Rotator cuff: It is a group of muscles and tendons. The rotator cuff surrounds the shoulder joint. Damage to cartilage and bone can injure the rotator cuff.
  • Fractures: Humerus is the longest bone in the human body. Any fracture in the humerus needs replacement. The prior surgery of fracture fixation failed inflammatory disorders. An overactive immune system causes
  •  Inflammatory disorders. The inflammation is lined with rheumatoid arthritis. This Rheumatoid arthritis damages the cartilage and the joint bone.
  • Osteonecrosis. Some shoulder conditions can affect blood flow in the humerus. When a bone is famished with blood, it can collapse.

Treatment of shoulder replacement

The damaged area of bone is cured with surgeries only. It depends on the condition of the damage. Doctors can suggest the type of treatment according to the condition of the damage. 

  • Anatomic total shoulder replacement: in this replacement, the ball and the socket are both replaced. The implants look like the natural shape of the bones.
  • Reverse total shoulder replacement: The ball and the socket are both replaced. The implants are reversed in reverse shoulder surgeries. The ball is joined to the shoulder blade. The socket is joined to the upper arm bone. This option is preferred when the rotator cuff is severely damaged.
  • Partial shoulder replacement: Only the replacement of the head takes place. When only the ball side joint is damaged, then doctors suggest this surgery. 

Only expert orthopedic surgeons perform these surgeries. There are the Best Orthopedic Surgeons in Ludhiana.

Symptoms for shoulder replacement

The patient faces a few symptoms of shoulder replacement. There are some most common symptoms. 

  • The pain is severe 
  • Face difficulties while sleeping.
  • Worse pain can cause difficulties in your regular activities.
  • Weakness in shoulder
  • Difficulties in shoulder movement 

If you feel any symptoms, you need to go to an orthologist.

Risk of shoulder surgeries

Patients can face many complications after the surgery treatment.

  • Dislocation: There is the possibility of the ball joint coming out from the socket.
  • Fracture: after the surgery, the humerus bone, the scapula or the glenoid bone can break
  • Loosening Implant: Shoulder replacement elements are durable, but they may loosen or become weak over time. The patient may need another surgery to replace the loose components.
  • Failure Rotator cuff: The group of muscles and tendons that surround the rotator cuff sometimes wear out after a partial or total anatomic shoulder replacement.
  • Nerve damage. Nerves in the area where the implant is placed can be injured. Nerve damage can cause numbness, weakness and pain.
  • Blood clots. The blood clotting occurs in veins. Clotting of blood can be life-threatening because it stops the flow of blood. If the blood can not flow in the body, other parts can not work properly. 
  • Infection. There is an infection at the incision site and in the deeper tissue that leads to another problem.

The benefit of shoulder surgery is it can relieve pain and increase the movement and functions of the shoulder. 

The surgeries are quite expensive. The average cost is 300000-500000 in India. The shoulder surgery cost is less than the Hip Replacement Surgery. Many surgeons perform shoulder surgery across the world, but the best doctors are there at Hunjan Hospital.

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बिना चीर-फाड़ के, टूटे हुए एंकल लिगामेंट को कैसे ठीक करें ?

 सामान्य चोट या खेल-कूद की वजह से एंकल (टखने) का टूटना किसी गंभीर समस्या से कम नहीं है, इसके अलावा अगर टखने टूटने की समस्या हमारे सामने आ भी जाए, तो कैसे हम इससे खुद का बचाव कर सकते है वो भी बिना सर्जरी की मदद से। तो जानते है की आखिर एंकल टूटने की समस्या क्यों उत्पन होती है, और अगर उत्पन हो भी जाए तो कैसे हम इससे खुद का बचाव कर सकते है ;

क्या है टूटे हुए या लिगामेंट एंकल की समस्या ?

  • चलते-चलते अचानक पैरों का मुड़ना या कई बार खेलते वक्त ऐड़ी का मुड़ना व्यक्ति के लिए बहुत सी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।
  • वही एंकल में चोट के ज्यादा तर मामले खासतौर पर खिलाड़ियों में देखने को मिलते है, मगर बता दे आपको की यह समस्या किसी भी उम्र में ऐड़ी मुड़ने पर हो सकती है।

अगर आपको भी टखने में चोट लग गई है जिसका असर काफी गंभीर नज़र आ रहा है तो बिना देर किए घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी का चयन करें।

टूटे हुए एंकल या लिगामेंट टूटने के कारण क्या है ?

  • फुटबॉल,बास्केटबॉल और स्कीइंग आदि में जब घुटना ज्यादा स्ट्रेच हो जाता है तब एक स्थिति ऐसी आ जाती है कि लिगामेंट खिंचते हुए टूट जाता है। ऐसे में घुटने का सुजना और उसमें दर्द का होना शामिल हो जाता है।
  • वही सही साइज के जूते न पहनने, ऊंचे-नीचे रास्तों पर चलने, ऊंची हिल की सैंडिल पहनने से भी ये समस्या उत्पन्न हो जाती है।

लिगामेंट क्या है ?

  • सही मायने में देखा जाएँ तो लिगामेंट्स रस्सीनुमा तंतुओं के ऐसे समूह हैं, जो हड्डियों को आपस में जोड़कर उन्हें स्थायित्व प्रदान करते हैं। इस कारण जोड़ सुचारु रूप से कार्य करते हैं। घुटने का जोड़ घुटने के ऊपर फीमर और नीचे टिबिया नामक हड्डी से मिलकर बनता है।

अगर आपके घुटने में दर्द या चोट की वजह से उसका दर्द रीढ़ की हड्डी के जोड़ों तक फैल गया है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में सर्वश्रेष्ठ स्पाइन सर्जन से संपर्क करना चाहिए।

इलाज क्या है टूटे हुए एंकल (टखने) को जोड़ने का ?

  • एंकल इंजरी में दवाईयों, बर्फ की सेक एवं बैंडेज/प्लास्टर द्वारा इसका इलाज संभव है। किन्तु गंभीर मामलों में जब ऐड़ी की लिगामेंट पूरी तरह टूट जाती है तब सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।
  • इसके अलावा घुटने का इलाज करने के लिए अब नई तकनीकों का प्रयोग किया जाता है और इस तकनीक में बड़ा चीरा नहीं लगाया जाता और आर्थ्रोस्कोपी तकनीक से मामूली चीरे के जरिए इसकी सर्जरी संभव की जाती है।
  • अगर आपके घुटने में मामूली सी चोट है तो इससे निजात पाने के लिए आपको कुछ दवाइयां और बर्फ की सेक का सेवन करना चाहिए। लेकिन समस्या गंभीर होने पर आपको समय रहते घुटने की सर्जरी का चयन करना चाहिए।

टूटे हुए एंकल (टखने) या लिगामेंट से बचाव के लिए बेस्ट हॉस्पिटल ?

  • यदि आपके टखने बुरी तरीके से टूट चुके है तो इससे बचाव के लिए आपको हुंजन हॉस्पिटल के संपर्क में आना चाहिए। इसके अलावा टखनों का टूटना अपने साथ कई और समस्याओं को जन्म दे सकता है।
  • इसलिए टखनों में गंभीर समस्या होने पर बेहतरीन डॉक्टर के संपर्क में जरूर से आए।